सूर्य नमस्कार के फायदे | सूर्य नमस्कार के आसन | सूर्य नमस्कार कितनी बार करना चाहिए

सूर्य नमस्कार क्या है – सूर्य नमस्कार का मतलब होता है सूर्य देवता को नमस्कार करना ये एक योग क्रिया है जिसमे सिर्फ एक आसान नही किया जाता है बल्कि इस सूर्य नमस्कार को करते समय कई आसनों को एक साथ किया जाता है इस सूर्य नमस्कार के किये जाने वाले आसन शरीर और मन को स्वस्थ रखने के लिए किया जाता है.

ये सूर्य नमस्कार एक ऐसा योग है जो हज़ारों योगासनों में सबसे ज्यादा आसान और सबसे ज्यादा फायदेमंद है और इसीलिए इसे सैकड़ों आसनों से सर्वश्रेष्ठ माना जाता है. यदि आप सम्पूर्ण व्यायाम करना चाहते है तो आप केवल सूर्य नमस्कार करने से ही आपको सम्पूर्ण व्यायाम जितना ही लाभ मिलता है यदि आप रोज योग आसन करते है तो काफी लाभ होता है.

सूर्य नमस्कार मंत्र

आप को सूर्य नमस्कार करने से पूर्व योग के नियम और मन्त्रों को जानना बहुत जरूरी है और सूर्य नमस्कार करने से आप यदि रोज सुबह उठ कर नीचे दिए हुए मंतर का उच्छारण करें मंत्र कुछ इस प्रकार है :-

“आदित्यस्य नमस्कारन् ये कुर्वन्ति दिने दिने।
आयुः प्रज्ञा बलम् वीर्यम् तेजस्तेशान् च जायते॥”

सूर्य नमस्कार का महत्व

जो लोग हर दिन योग और आसन करते है उनके लिए ये बहुत ही ज्यादा फायदेमंद है क्योंकि रोजाना योग करने से एवं सुबह सूर्य नमस्कार करने वालों की आयु, प्रज्ञा, बल, वीर्य और तेज आदि में वृद्धि होती है और स्वस्थ जीवम की कामना रखने वाले इस आसान को जरूरी आजमाएं.

सूर्य नमस्कार में आसनों का मेल होता है जिन्हे आप एकाएक करें लेकिन इन आसनों को करने के कुछ नियम है जिनका आपको पालन करना चाहिए तभी आप सूर्य नमस्कार का फायदा उठा पाएंगे एवं सूर्य नमस्कार कई सारी बीमारियों को रोकता है और आपको स्वस्थ बनाता है.

सूर्य नमस्कार के आसन

  • पहला आसन – ताड़ासन या समस्थिति में सीधे खड़े होना है.
  • दूसरा आसन – ऊर्ध्व वृक्षासन होता है जिसमे आपको अपनी श्वास को अंदर की ओर खींचना है औरफिर आपको ऊर्ध्व वृक्षासन में स्थिति में आ जाना है. इस आसान को करते समय अपनी पीठ को बिलकुल सीधा रखें एवं दोनों को जोड़ कर खड़े रहना एवं आपकी नज़र योग करते समय हाथ के उँगलियों की तरफ होनी चाहिए.
  • तीसरा आसन – इस आसन को को उत्तानासन कहते है इस में श्वास को धीरे से छोड़ें और उत्तानासन करने की अवस्था में आ जाना है लेकिन इस बात को ध्यान रखें की पीठ के जोड़ों से पीछे की और झुकना है, एवं जितना आप पीछे की तरफ झुक सकें उतना ही झुके ज्यादा से ज्यादा झुकने की कोशिश करें और अपनी नज़र अपनी नाक की सीध में रखें.

  • चौथा आसन – ये आसन बहुत ही सरल है इसे अर्ध उत्तानासन कहते है जिसे करते समय अपनी श्वास को अंदर की ओर करना है ओर फिर इस ऊर्ध्व उत्तानासन में आ जाना है. और इस को करते समय अपनी पीठ के जोड़ों से ऊपर की तरफ उठना है लेकिन अपनी पैरों की उंगलियों की टिप्स ज़मीन को टच करनी चाहिए और पीठ को 90 डिग्री तक सीधा रखना है और नज़र का भी ध्यान रखें आपकी नज़रें नाक पर केंद्रित होनी चाहिए.

चतुरंग दंडासन करने से लाभ

  • पांचवा आसन – इस को चतुरंग दंडासन कहा जाता है और ये कई योगों में उपयोग किया जाता है इस में आपको सांस बाहर की छोड़नी है और अपने राइट पैर को लेफ्ट पैर के पीछे ले जाना है और ऐसा करंट ही आप ही चतुरंग दण्डासन की स्तिथि में आ जायें. याद रखें आपका पूरा शरीर एक सीध में रखना है और अपनी हथेलियाँ सीने की तरफ रखना है एवं दोनों कोहनियाँ तन के समीप होनी चाहिए. नज़र का भी ध्यान रखें आपकी नज़रें नाक पर केंद्रित होनी चाहिए.

चतुरंग दंडासन

  • छटवां आसन – इसको ऊर्ध्व मुख श्वानासन कहते है और इसमें श्वास की अंदर की ओर लें और ऊर्ध्वमुखश्वानासन की स्थिति में आ जायें. एवं अपने हाथ बिलकुल सीधे रखें, गर्दन को लम्बा करें . एवं कंधों में ढहने ना दें, और हो सके तो आप केवल अपने पंजों के बल पर खड़े रहें.

ऊर्ध्व मुख श्वानासन

  • सातवां आसन – इस को अधो मुख श्वानासन कहा जाता है और इसमें भी श्वास छोड़ें और अपने आप को अधोमुखश्वानासन में ले आएं फिर जितना हो सके उतना ही अपनी एडियों को ज़मीन पर टिका कर रखें एवं दोनों हाथों को कम से काम कंधों की चौड़ाई जितनी दूरी पर रखें एवं अपनी नज़र को नाभि पर पर केंद्रित कर लें. और इसे करते समय लगभग पांच बार तक सांस को अंदर बाहर करें.

ऊर्ध्व उत्तानासन करने के फायदे 

  • आठवां आसन – अर्ध उत्तानासन में अपनी सांस को अंदर की और कीचे और अपनी राइट पैर को लेफ्ट पैर के आगे ले आयें और फिर इसे करने के बाद आप फिर से ऊर्ध्व उत्तानासन की पोजीशन में आ जाएँ.

अर्ध उत्तानासन

  • नवां आसन – उत्तानासन में अपनी सांस को बाहर की तरफ छोड़ें एवं ऐसा करते हुए आप फिर इसे करने के बाद आप फिर से उत्तानासन की पोजीशन में आ जाएँ.
  • दसवां आसन – इसे ऊर्ध्व वृक्षासन कहते है क्योंकि इसमें आपको पेड़ के सामन होना पड़ता है अर्थात इस को करते समय अपनी सांस को अंदर की और लें एवं ऐसा करते हुए आप पुनः ऊर्ध्व वृक्षासन की स्थिति में आ जायें.
  • ग्यारवां आसन – ये आसान वही है जंहा से आपने सूर्य नमस्कार की शुरआत की थी और ताड़ासन या समस्थिति आसन करते हुए अपने सूर्य नमस्कार को समाप्त करें.

सूर्य नमस्कार के फायदे | Surya Namaskar ke fayde

आसान करने से कई सारे लाभ होते है या शरीर को फिट रखने में काफी फायदेमंद होते है. और सूर्य नमस्कार के निरन्तर प्रयास आप अपने शरीर को स्वस्थ रखें और मन की स्वस्थता के लिए मणिपुर चक्र आसन करें एवं आत्मा को सबल करें के लिए मंत्रोच्चार करते रहें.

सूर्य को सभी ग्रहों में सबसे बढ़ा और दिव्य एवं पूजनीय माना जाता है क्योंकि समस्त सांसर को अन्धकार से मुक्त करने के लिए सूर्य ही आता है और प्राचीन भारतीय सभ्यता में इस बात का उल्लेख मिलता है सूर्य करोड़ों बर्षो से जीवन को सुचारु रूप से चलाने में महत्वपूर्ण है. और सूर्य को धन्यबाद देने के लिए सूर्यनमस्कार किया जाता है.

यदि आपको ये जानकारी है कि सूर्य नमस्कार किस तरह से किया जाता है या फिर इसको करने की विधि जान लेना भी काफी नहीं है और एवं इसके पीछे का विज्ञान भी है. और भारत के प्राचीन ऋषियों एवं मुनियों के अनुसार सूर्य नमस्कार शरीर के विभिन्न अंगों को ठीक रखने के काम आता है.

सूर्य नमस्कार कैसे करें

मणिपुर चक्र जो कि नाभि के पीछे स्थित जो मानव शरीर का केंद्र भी है. सूर्य नमस्कार के रोजाना करने से शरीर के मणिपुर चक्र का विकाश होता है. जिससे मानव शरीर कि रचनात्मकता और अन्तर्ज्ञान की शक्ति बढ़ जाती है.मणिपुर चक्र में ही हमारे भाव एकत्रित होते है सामान्यतया मणिपुर चक्र का आकार आँवले के बराबर होता है, लेकिन जो योग ध्यान के अभ्यासी हैं उनका मणिपुर चक्र 3 से 4 गुना बड़ा हो जाता है.

मणिपुर चक्र

पूरे सूर्य नमस्कार में 12 प्रकार के आसान होते हैं. एवं इसे सुबह के वक़्त करना सबसे बेहतर माना जाता है और सूर्य नमस्कार को नियमित करने से रक्त संचरण सही होता है, एवं आपका स्वास्थ्य भी बहुत ठीक रहता है और शरीर को भी रोगमुक्त बनाता है. एवं रोजाना सूर्य नमस्कार करने से हृदय, यकृत, आँत, पेट, छाती, गला, पैर के लिए बहुत लाभदायक है.

सूर्य नमस्कार को सुबह करने से दिनभर के लिए सुस्ती से मुक्ति मिल जाती है एवं दोपहर के समय करने से ये तुरंत ऊर्जा देता है जिससे शाम तक कार्य करने की शक्ति बढ़ जाती है एवं शाम को करने से रात को नींद अच्छी आती है.सूर्य नमस्कार हर उम्र के व्यक्तियों को करना चाहिए इसके के लिए उम्र की जरूरत है ये सभी के लिए फायदे मंद है.

महिलाओं को सूर्य नमस्कार करने से फायदे

जो महिलाएं सूर्य नमस्कार को प्रतिदिन करती है उनके शरीर की बनावट में अंदर आ जाता है और उनका शरीर बहुत ही ज्यादा लचीला हो जाता है उनके जोड़ो की समस्या भी दूर हो जाती है और जो सूर्य नमस्कार कर सकता है वो महीनो के संतुलित आहार से भी नही कर सकता है.

एवं जो महिलाओं अपने स्वस्थ और फिटनेस को लेकर चिंतित रहती है उनके लिए यह एक वरदान है. इसे रोज करने से आप कई गुना कैलोरी (Calorie Burn) बर्न कर सकती है. और पेट की मांसपेशियो को दुरुस्त बनाता है ये आसन थाईरॉड ग्रंथि (जो हमारे वजन पर ख़ासा असर डालती है) के हॉर्मोन के स्राव को बढ़ाकर पेट की अतिरिक्त वसा को कम करता है.

एवं चेहरे पर प्राकृतिक निखार और सुन्दरता लाने के लिए भी बहुत ही उपयोगी है. और जिन महिलयों एवं युवतियों का मासिक धर्म की अनियमितता होती है ये उस समस्या को भी दूर करता है. और प्रसव के दौरान होने वाले दर्द को भी कम करता है. सूर्य नमस्कार के कई सारे लाभ है जिन्हें आप भी ले सकते है यदि आप रोजाना कोई भी योग आसन करती है तो भी आपको लाभ होगा.

बच्चो को सूर्य नमस्कार क्यों करना चाहिए?

ये शरीर के साथ साथ मन एक शांति देता है जिससे मन की एकाग्रता को बढ़ती है और ज्यादातर बच्चों में इस बात के लिए कॉम्पिटिशन बढ़ता जा है. इसीलिए उन्हे नित्यप्रति सूर्य नमस्कार करना चाहिए क्योंकि रोजाना सूर्य नमस्कार करने से उनके परीक्षा को लेकर चिंता और असहजता कम होती है.

इसे करने से बॉडी में शक्ति और ऊर्जा की वृद्धि होती है.पांच साल की उम्र से आप सूर्य नमस्कार करते है तो शरीर में लचीलापन बना रहता है और जोड़ों में होने वाले दर्द की समस्या बुढ़ापे तक भी नहीं आती है.

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