रीढ़ की हड्डी में दर्द का इलाज

रीढ़ की हड्डी में दर्द का इलाज: जब किसी व्यक्ति को कमर में दर्द होता हैं तो वे इस दर्द को हल्का दर्द समझकर नजरअंदाज कर देता हैं| लेकिन यही दर्द धीरे धीरे बढ़ता हैं और फिर रीढ़ के हड्डी तक जा पहुंचा हैं| जब दर्द रीढ़ की हड्डी तक पहुँच जाता हैं हम तब इस पर ध्यान देते हैं और फिर हमें इसका इलाज ही कराना पड़ता हैं|

Treatment For Slip Disc
Treatment For Slip Disc

लेकिन जब हम डॉक्टर के पास इलाज के लिए जाते हैं तो डॉक्टर पहले इस दर्द के बारे में जनता हैं| कि रीढ़ की हड्डी के किस भाग से शरीर के किस भाग को शक्ति मिलती हैं| ये जानने के बाद ही इसका इलाज किया जाता हैं जैसा कि कहा जाता हैं| रीढ़ की हड्डी मानव शरीर के लिए आवश्यक हैं रीढ़ की हड्डी से शरीर की सारी हड्डियां जुडी होती हैं|

रीढ़ की हड्डी का शरीर के किन किन भागों से होता हैं संबंध

  • दांत, गाल, बाहरी कान, चेहरे की हड्डियां
  • साइनस, जीभ, आँखों की नाड़ी, आँखे, माथा
  • मुंह, होंठ, कान की नलिका, नाक
  • स्वरतंत्र, ग्रसनी, गले की ग्रंथियां
  • बगल में झिल्लीदार थैलियां, कोहनियां थाइरॉयड ग्रंथि
  • कंधे, टांसिल गले की मांसपेशियां
  • पीठ के ऊपर भाग के साथ रीढ़ की हड्डी का संबंध
  • आमाशय, नाभि-चक्र, जिगर, रक्त, पित्ताशय, छाती, सांस की नलिका, फेफड़े
  • ह्रदय वाल्व, अग्रबाहु, हाथ, श्वास-मार्ग, भोजन प्रणाली
  • अंतड़ियाँ, गर्भाशय, नालियां, गालियां, आड्रेनल ग्रंथियां
  • गुर्दे, प्लीहा, डायाफ्राम, पेट के नीचे की आंत, अग्नाशय
  • टांगे, पैर, टखने, पेट, जांघ, एपेण्डिक्स, लिंग, मूत्राशय
  • घुटना, बड़ी आंत, पीठ के नीचे की मांसपेशियां, शियटिका, वातनाड़ी
  • सैक्रम की 5 हड्डियां, कोक्सिजियल की 4 हड्डियां|

इन सभी भागों में से किसी भी भाग में अगर कोई रोग हो जाता हैं| तो इसके प्रभाव से शरीर के अंगों में भी रोग पैदा हो जाते हैं| आज की जीवनशैली तनावपूर्ण हैं और इसके साथ ही मानव के गलत रहन-सहन, शारीरिक श्रम की कमी, बैठने व सोने के गलत ढंग आदि के कारण लोगों में रीढ़ की हड्डी सम्बंधी बीमारी तेजी से फ़ैल रही हैं|

स्पाइन की बनावट

हमारे शरीर की सबसे खास हड्डी रीढ़ की ही होती हैं| रीढ़ की हड्डी प्रात: 33 हड्डियों के जोड़ों से मिलकर बनती हैं| प्रत्येक दो हड्डियां आगे की तरफ एक डिस्क के द्वारा और पीछे की तरफ दो जोड़ों के द्वारा जुड़ी रहती हैं| ये डिस्क प्रायः रबड़ की तरह होती हैं| (रीढ़ की हड्डी में दर्द का इलाज)

spine ki problem
स्पाइन की बनावट

जो इन हड्डियों को जोड़ने के साथ-साथ उन्हें लचीलापन भी प्रदान करती हैं| इन्हीं डिस्क में उत्पन्न हुए विकारों को स्लिप्ड डिस्क कहते हैं यही हमारी रीढ़ की हड्डी की बनावट होती हैं| ऐसे ही हड्डियों को जोड़कर रीढ़ की हड्डी तैयार होती हैं|

रीढ़ की हड्डी की बीमारी में होता क्या हैं

रीढ़ की हड्डी एक ऐसी हड्डी होती हैं जिससे शरीर की सारी हड्डियां जुडी होती हैं| इस बीमारी में मणके अपनी जगह से हिल जाते हैं| मणके का घुर जाना या फिर इसका बढ़ जाना एवं डिस्क भी अपनी जगह से हिल जाना या फिर सरक जाना ऐसा होता हैं रीढ़ की हड्डी की बीमारी में|

डिस्क हमारी रीढ़ की हड्डी के मणके में एक छोटा सा हिस्सा होता हैं| जो रीढ़ की हड्डी में शॉकर का काम करता हैं यह किसी भी प्रकार के आकस्मिक आघात से रीढ़ की हड्डी की रक्षा करता है| और अपने साथ जुड़े हुए दो मणकों को हिलने डुलने में मदद करता है| जब यह डिस्क किसी भी कारण से अपनी जगह से हिल जाती हैं और इसी घटना को रीढ़ की हड्डी की बीमारी कहा जाता हैं|

स्लिप डिस्क के प्रकार

सर्वाइकल डिस्क स्लिप (Cervical Disc Slip): ये गर्दन में होता हैं और ये पांचवी व छठी या फिर छठी सातवीं कशेरुक के बीच होता हैं| इससे दर्द सिर के पिछले भाग, गर्दन, कंधे के हड्डी, बांह और हाथ में होता हैं|

थोरैसिक डिस्क स्लिप (Thoracic Disc Slip): ये तब होता हैं जब रीढ़ की हड्डी के बीच के भाग में आस पास से दबाव पड़ता हैं| वैसे इसके होने की संभावना बहुत ही काम होती हैं इससे पीठ के मध्य और कंधे के क्षेत्र में दर्द होता हैं| ये टी 1 से टी 2 कशेरुक के क्षेत्र को प्रभावित करता हैं|

लंबर डिस्क स्लिप (Lumbar Disc Slip): ये रीढ़ की हड्डी के निचले हिस्से में होता हैं| ये अक्सर चौथी और पांचवीं कशेरुका के बीच होता हैं| इससे पीठ के निचले हिस्से जैसे कूल्हे, जांघ, गुदा आदि में दर्द होता हैं| और पैर की अंगुली में भी जा सकता हैं|

रीढ़ की हड्डी में दर्द होने के कारण

reed ki haddi me dard
रीढ़ की हड्डी में दर्द होने के कारण

शरीर को अत्यधिक मोड़ने या गलत तरीके से झुकने से भी यह समस्या उत्तपन्न हो सकती है. कभी-कभी अपनी दक्षता से अधिक बोझ उठाने के कारण हम स्लिप डिस्क को बुलावा देते हैं. इससे हमारी कमर, गर्दन व कूल्हों पर बुरा प्रभाव पड़ता हैं. शरीर में सुन्नपन या लकवा के कारण जिम में गलत तरीके से बजन उठाना या अन्य व्यायामों को समुचित रूप से न करना.

रीढ़ की हड्डी में दर्द होने के लक्षण

  • शरीर के एक तरफ के हिस्से में दर्द या स्तब्धता होना.
  • आपके हाथ या पैरों तक दर्द का फैलना.
  • रात के समय दर्द बढ़ जाना या कुछ गतिविधियों में ज्यादा दर्द होना.
  • खड़े होने या बैठने के बाद दर्द का ज्यादा हो जाना.
  • थोड़ी दूरी पर चलते समय दर्द होना.
  • अस्पष्टीकृत मांसपेशियों की कमज़ोरी.
  • प्रभावित क्षेत्र में झुनझुनी आना, दर्द या जलन होना.

रीढ़ की हड्डी में दर्द का इलाज (Slip Disc Treatment in hindi)

स्लिप्ड डिस्क का इलाज करने के लिए कुछ लोगों को तो सर्जरी करने की जरुरत पड़ती हैं| क्योंकि ये उस स्टेज तक पहुँच जाती हैं कि फिर बिना सर्जरी के इसे ठीक नहीं किया जा सकता हैं| इसके अलावा कई बार व्यायाम या दवाएं भी इस रोग में मददगार होती हैं|

समय रहते अगर आप इसका इलाज करा लेते हैं तो बहुत अच्छा हैं| क्योकि उस समय तक आप व्यायाम या दवाओं के सेवन से ही ठीक हो जाते हैं| डिस्क से जुड़े भाग जो बाहर की तरफ आने लगते हैं उन्हें ठीक करना इस सर्जरी का लक्ष्य होता हैं|

रीढ़ की हड्डी के दर्द से बचाव

शरीर का एक स्वस्थ वजन बनाये रखे, क्योंकि हमारे शरीर में सही वजन होने पर हम कई सारी परेशानियों से बच जाते हैं| इससे आपकी पीठ के निचले हिस्से पर दबाव काम हो सकता हैं| नियमित रूप से व्यायाम करें|

यदि आप धूम्रपान करते हैं तो इसे छोड़ दें| निकोटिन आपकी पीठ में डिस्क को नुकसान पहुंचा सकता हैं| क्योंकि यह पोषक तत्वों को अवशोषित करने की डिस्क्स की क्षमता को कम करता हैं| और डिस्क सूख सकती हैं और भुरभुरी हो सकती हैं| आप पद रहे हैं अभी रीढ़ की हड्डी में दर्द का इलाज 

वजन उठाने के लिए सही तकनीक का उपयोग करें| खाली झुकने या टेढ़े बैठने से ही पीठ का दर्द नहीं हो सकता लेकिन यदि पीठ पर चोट आई हैं| तो आप गलत तरीके से बिलकुल भी ना बैठे क्योंकि इससे आपकी कमर का दर्द और भी बढ़ सकता हैं|

खड़े होने या चलने के दौरान अपने कान, कंधों, और कूल्हे एक सीधी रेखा में रखें| बैठने पर अपनी पीठ को सुरक्षित रखें जब आप कोई लम्बे समय तक बैठने का काम करते हैं| तो आपको अपनी पीठ और कुर्सी के बीच एक छोटा सा तकिया या तौलिया को गोल करके रखें|

नींद में अपनी पीठ को सही स्थिति में रखें एक तरफ सोते समय घुटनों के बीच एक तकिया रखें|

स्लिप डिस्क में परहेज

  1. स्लिप डिस्क में ज्यादा आराम नहीं करना चाहिए.
  2. जितना हो सकें गरिविधियाँ करें.
  3. कोई भी ऐसी गतिविधि न करें जो आपके लक्षणों को बढ़ा सकती हैं.
  4. ज्यादा समय के लिए खड़े या बैठे रहने से बचें.
  5. इससे आपकी रीढ़ की हड्डी पर तनाव बढ़ सकता हैं.
  6. चोट लगने के बाद कुछ समय के लिए पेट के बल न लेटें.

स्लिप डिस्क में क्या खाना चाहिए?

विटामिन सी, विटामिन ई और विटामिन डी से समृध्द पदार्थों को खाना चाहिए| ग्लूकोसामाइन और कोन्ड्रॉयटिन युक्त पूरक पदार्थों का सेवन करें| कशेरुकाओं को स्वस्थ रखने के लिए आहार में पर्याप्त कैल्शियम लें| सामान्य तौर पर आहार में सब्जियों फल और लीन प्रोटीन जैसे मछली, चिकन और फलियां लेने चाहिए|

नींबू का रस: नींबू के रस में थोड़ा सा नमक मिला लें, इसे अच्छे से मिक्स कर लें. इस तरह रोजाना नींबू का रस बनाकर पियें इससे कमर दर्द में बहुत अधिक लाभ होता है. नीम्बू में विटामिल सी की प्रचुर मात्रा पायी जाती है. और इससे आपको किसी भी प्रकार का नुकसान भी नहीं करता हैं. नींबू का सेवन स्वाथ्य लाभकारी होता हैं|

कमर के पुराने से पुराने दर्द के लिए आसान सा नुस्खा

रात में 60 ग्राम गेंहू के दाने पानी में भिगो कर रख दें| और सुबह इन भीगे हुए गेंहू के साथ 30 ग्राम खसखस तथा 30 ग्राम धनिया के छिलके हटाकर प्राप्त होने वाली गिरी मिलाकर बारीक़ पीस लें| इस प्रकर एक चटनी तैयार हो जाएँगी|

आप फिर इस चटनी को दूध में पका लें और खीर बना लें| फिर इस खीर को आवश्यकता अनुसार सप्ताह दो सप्ताह खाने से कमर का दर्द नाश होकर ताकत बढ़ती हैं| और इसी नुस्खे से पाचनशक्ति की कमजोरी भी मिट जाती है. इससे कमर का दर्द दूर हो जाता हैं|

पूरी नींद लें: कमर के दर्द को रोकने के लिए पूरी नींद लेना बहुत जरुरी हैं. हर एक आम आदमी को 8 घंटे की पूरी नींद लेना चाहिए. क्योंकि पूरी नींद लेने से आप बहुत से रोगों से छुटकारा पा सकते हैं. नींद से कमजोरी अंगों को आराम मिलता हैं. और वे फिर से कार्य करने के लिए तैयार हो जाते हैं|

यदि आप पूरी नींद नहीं लेते तो आपके मजबूत अंग तो जल्दी, दुबारा फिर से काम करने के लिए तैयार हो जाते हैं. लेकिन आपके शरीर के जो कमजोर अंग होते हैं, ये तैयार नहीं हो पाते हैं. क्योंकि इनको पूरा आराम नहीं मिल पाता|

रीढ़ की हड्डी में दर्द के घरेलू उपचार

एलोवेरा के लड्डू खाएं: एलोवेरा दर्द के लिए बहुत ही अच्छा उपाय है. सबसे पहले एलोवेरा को लें और फिर आप कुछ कंडे (गोबर के उपले) लें.  हो सकें तो आप गाय के गोबर के कंडे को लें इससे ज्यादा लाभ होता हैं. अब आप इन कंडो को जला लें, जब कंडे जल के अंगारे बन जाये तो इन अंगारों पर अलोएवेरा को रख दें|

aloe vera ke fayde
एलो वेरा के लड्डू रीड की हड्डी में दर्द के उपचार में उपयोगी

अब एलोवेरा पर ऊपर से अंगारे बिछा दें. अब एलो  वेरा को काटकर छील लें. व गूदे को बाहर निकाल लें इसके गूदे को अच्छे से बारीक़ पीस लें. व इसमें थोड़ा सा आटा मिला लें. और फिर देसी घी व खांड मिलाकर मिक्स कर लें|

इन सभी को मिक्सचर से हलवा बना लें इस हलवे के 20 ग्राम के जितने भी लड्डू बने बना लें अब आप इन लड्डू का सेवन रोजाना नियमित रूप से करें रोज सुबह के समय खाली पेट खाए|

इस तेल की मालिश से आपकी रीढ़ की हड्डी रोग सही हो जाता है

तेल की मालिश: तेल की मालिश करने के लिए सबसे पहले आप लहसुन को लें. और इसे छील लें, इसके बाद इन्हे बारीक़ टुकड़ों में काट लें. अब इन टुकड़ों को एक कांच के बर्तन में डाल दें. फिर इसमें जैतून या सूरज मुखी दोनों में से किसी भी एक का तेल लें. और इसे बर्तन में डाल दें अब इस बर्तन को अच्छे से पैक कर दें|

और दो हफ़्तों के लिए किसी अँधेरे से भरे कमरे में रख दें. और दो हफ्ते तक आप रोजाना इसे अच्छे से हिलाकर रखें. फिर दो हफ्ते बाद आप डिब्बे से तेल को छान कर निकाल लें. और फिर इस तेल से रोजाना सुबह और सोने से पहले मालिश करें|

पत्ता गोभी का उपयोग: उबलते दूध में पत्ता गोभी डालें. और इसे तब तक उबालें जब तक दूध उबालकर आधा से आधा न रह जाये. सिर्फ पत्ते ही दिखने लगे तब तक उबालें. फिर इसके बाद इसे अपनी कमर पर लगाएं. इन पत्तों को कमर से बांध दें और 20-30 मिन्ट्स तक ऐसे ही रहने दें|

patta gobhi ke fayde
पत्ता गोभी का उपयोग रीड की हड्डी में दर्द के उपचार के लिए

दूध का सेवन: दूध में कैल्शियम बहुत अधिक मात्रा में पाया जाता हैं. और कैल्शियम हड्डियों की सेहत के लिए बहुत अधिक लाभदायक होता हैं. यह हड्डियों में होने वाली बिमारियों को रोकता है. और दूध आपकी हड्डियों को मजबूती देता हैं| इसके लिए एक ग्लास गर्म दूध में एक चम्मच शहद डालें|

दूध को रोज़ाना पीजिये, हालांकी इससे तुरंत आपकी नसों को आराम मिलेगा, लेकिन हड्डी में फायदे के लिए आपको इसका लगातार सेवन करने से ही आराम मिलता हैं. दूध में कई सारे पोषक तत्व होते हैं. जो शरीर के लिए और हड्डियों के लिए जरुरी होते हैं|

रीढ़ की हड्डी की दबी हुई नसों का इलाज

अदरक की चाय का सेवन: अदरक में Anti-Inflammatory Compounds होते हैं. और ये गुण पीठ के दर्द में लाभदायक होते हैं. जब भी आपकी कमर में अकड़न या दर्द सा महसूस होने लगे तो आप तुरंत ही अदरक की चाय पियें|

adrak ki chai peene ke fayde
अदरक की चाय का सेवन रीड की हड्डी में दर्द के उपचार के लिए

चाय बनाने के लिए अदरक को काट कर एक चौथाई पानी में डालकर आधे घंटे तक उबालें. इसके बाद पानी ठंडा हो जाने पर इसमें थोड़ी सी शहद मिलाकर पियें इससे आपको तुरंत ही आराम मिल जायेगा|

गर्म पानी से नहाना: अगर आपको कमर में चोट लगे और उस चोट को ज्यादा समय हो गया हैं. तो आप यह back bones की elasticity को बढ़ता हैं. जिससे दर्द दूर हो जाता हैं. आप इसका दो तरह से उपयोग कर सकते हैं. एक तो आप कमर पर hot pad रखकर, दूसरा गर्म पानी से कमर पर सेंक करने से|

आप चाहे तो गर्म पानी को Bath Tub में भर कर भी नहा सकते हैं. इससे भी राहत मिलती हैं लेकिन ध्यान रहे 20 मिनट से अधिक सिकाई या नहाएं नहीं|

HealthTipsInHindi is now Officially in English, Go to Viral Home Remedies For Latest Health Tips , Remedies and Treatments in English