सांस की बीमारी के लक्षण, कारण और इसका इलाज | दमा का घरेलु इलाज

Asthma Treatment in Hindi: हमारे देश में सांस की बीमारी के रोगी बड़ते ही जा रहे हैं. इसका सबसे बड़ा कारण है हमारे यहाँ बढता जानलेवा प्रदूषण. वैसे तो आप इस बीमारी के बारे में जानते ही होंगे, कि सांस की बीमारी में रोगी की सांस फूलने लगती हैं.

कुछ लोग हल्की फुल्की मेहनत के बाद साँस भर आने को ही गलतफहमी के चलते दमा का रोग समझ लेते हैं. पर ऐसा नहीं होता हैं ये सांस कई कारणों से फूल सकती है.

Asthma symptoms in Hindi

सांस की बीमारी के लक्षण

ये भी एक मिथ्य है कि, मोटापा ग्रस्त इंसानों को ये बीमारी होती है. लेकिन ऐसा भी नहीं है. ये बीमारी दुबले-पतले लोगों को भी हो सकती है.

हमें जीवित रहने के लिए सांस लेने की जरुरत होती है, हम फेंफड़ो के ज़रिये ही सांस ले पाते हैं. ऐसे में साँस की बीमारी गंभीर अवस्था में होने से रोगी की जन को खतरा हो सकता है.

अस्थमा क्या होता है? | What is asthma in Hindi

जब मानव शरीर में श्वास नलियों के जाम होने या फिर किसी संक्रमण के चलते उनमे सूजन आ जाने के कारण रोगी ठीक तरह से सांस नहीं ले पाता. इसे अस्थमा या दमा का रोग कहते हैं. स्थानीय बोलचाल की भाषा में इसको श्वास का रोग भी कहा जाता है.

फेफड़ों में सूजन और संक्रमण होने की वजह से भी हमें सांस लेने में दिक्कत होती है. दमा के रोगी को मेहनत का काम करते ही, या जीने चड़ते वक़्त और पैदल चलने में ही थकान का अनुभव होने लगता है .

सांसी लेने में तकलीफ होने लगती हैे. सांस लेने के लिए हमारे फेफड़ों में छेद होते हैं. उन छेद को बलगम (कफ) ढक लेता है.

ऐसा तेज़ सर्दी और जुकाम के कारण भी हो सकता है. जिसमे रोगी के फेफड़ों पर बलगम जम जाता है. यहाँ नीचे कुछ उपचार दिए जा रहे हैं, जिनसे आप अस्थमा के रोग का घरेलु इलाज कर सकते हैं.

सांस फूलने के कारण | Reason of asthma in Hindi

सांस फूलने के कई कारण हो सकते हैं, लेकिन सांस मानव में दो तरह से फूलती है. कुछ लोगों में सांस कुछ समय के लिए ही फूलती है, लेकिन एक समय अवधी के बाद ठीक हो जाती है. ऐसी सांस फूलने के कुछ सामान्य कारण भी हो सकते हैं.

Symptom's of asthma in Hindi

दमा रोगी

  • अधिक वजन बढ़ने के कारण
  • सिमित आकार से बाहर होने के कारण
  • वायु प्रदूषण या हवा में एलर्जिक पदार्थ का शामिल हो जाने के कारण
  • अधिक तापमान बढ़ने के कारण
  • अत्यधिक और जोरदार व्यायाम करने से
  • अधिक चिंता करने से
  • किसी लम्बे रोग के चलते

ये गंभीर स्थिति के संकेत भी हो सकते हैं

वहीं कुछ लोगों में सांस फूलने की परेशानी अधिक समय तक रहती है. ऐसे में चिंता करने की बात है. क्योकि ये किसी बीमारी के लक्षण भी हो सकते हैं.

  • आस्थमा के कारण
  • एनीमिया के कारण
  • क्रोनिक ऑब्सट्रक्टिव पल्मोनरी डिजीज (COPD) रोग के कारण
  • दिल के कार्यों में असामान्यता के कारण
  • फेफड़ों में कैंसर के कारण
  • फेफड़ों से सबंधित रोग के कारण

सांस की बीमारी के लक्षण | Asthma symptoms in Hindi

  • गंभीर एलर्जी की प्रतिक्रिया होना
  • श्वसन मार्ग अवरूध्द होना
  • दिल का दौरा पड़ना
  • दिल रुक जाना
  • हृदय का आकार बढ़ना
  • दिल में सूजन होना
  • फेफड़ों में खून के थक्के जमना
  • निमोनिया
  • कार्बन मोनोक्साइड पाईजनिंग
  • बाहरी चीजों व पदार्थों को सांस द्वारा अंदर खींचना

सांस फूलने से जुड़े जोखिम कारक

पहले कभी हुए फेफड़ों सबंधित रोग, सांस की समस्या पैदा करने वाले कारक बन सकते हैं.

  • मांसपेशियों में कमजोरी
  • हीमोग्लोबिन स्तर कम
  • व्यायाम में कमी या बीमारी के कारण शारीर का असामान्य आकार
  • गंभीर मोटापा
  • लगातार एलर्जिक पदार्थों के संपर्क में आना
  • धूम्रपान करना

आपको सांस फूलने की समस्या में केला अधिक मात्रा में नही खाना चाहिए.

नींबू के पानी को हल्का गरम करके और उबालकर पीना ही लाभकारी होता हैं आप इसे बिना गर्म किये ना पियें.

सांस की बीमारी का इलाज | Asthma Treatment in Hindi

सांस फूलने की बीमारी वाले व्यक्तियों के लिए अंजीर अमृत के समान हैं. क्योंकि अंजीर छाती में जमी बलगम और सारी गंदगी को बाहर निकाल फेक देने में सहायक होता है (1). जिससे सांस नली साफ़ हो जाती हैं और सुचारू रूप से कार्य करती हैं.

अंजीर

इसका उपयोग के लिए आप तीन अंजीर गरम पानी से धोकर रात को एक बर्तन में भिगोकर रख दें. फिर सुबह खाली पेट नाश्ते से पहले उन अंजीरों को खूब चबाकर खाए उसके बाद वह पानी भी पी लें.

इस नुस्खे का प्रयोग लगातार एक महीने तक कीजिये. इसके प्रयोग से फर्क आपको खुद ही महसूस होने लगता हैं.

तुलसी और सौंठ का काढ़ा

तुलसी में रोग प्रतिरोधक क्षमता को बढ़ाने के गुण पाए जाते हैं. तुलसी श्वसन तंत्र पर बाहरी प्रदूषण और एलर्जी के हमले से रक्षा करने में समर्थ हैं.

इसलिए जिनको भी सांस फूलने की या दमा की शिकायत हो उन लोगो को तुलसी से बने इस काढ़े का इस्तेमाल अवश्य ही करना चाहिए.

Prevention of asthma in Hindi

तुलसी और सौंठ का काढ़ा अस्थमा के उपचार के लिए

तुलसी के उपयोग करने के लिए आधा कप पानी में 5 तुलसी की पत्ती, एक चुटकी सौंठ पाउडर, काला नमक और काली मिर्च डालकर अच्छे से उबाले.

और फिर ठंडा करके जब यह काढ़ा गुनगुना सा रह जाए तब इसका सेवन करें. प्रतिदिन इस काढ़े के सेवन से आपके सांस फूलने की समस्या जड़ से समाप्त हो जाएगी.

सांस फूलने की घरेलू दवा

अजवायन: श्वसन नली को साफ़ करने और सूजन को काम करने में अजवाइन बहुत ही अच्छा उपाय होता हैं. इसके लिए स्टीम या भाप लेना बहुत मददगार होता हैं.

भाप लेने से यदि श्वास नली में सूजन ठीक होती हैं. और उसमे आराम हो जाता है और कचरा भी निकल जाता हैं.

अजवाइन का उपयोग करने के लिए आपको अजवायन को पीसकर पानी में उबलना होता हैं.

फिर जब ये अच्छे से उबाल जाएँ तो इसकी भाप लेना होता हैं. क्योंकि अजवायन की भाप सूजन को खत्म और दमे और सांस फूलने की समस्या में राहत दिलाती हैं.

तिल का तेल

कई लोगों को सर्दी के कारण सांस की परेशानी होती हैं. और ठंड की वजह से छाती जाम हो जाती है. रात के समय दमे का प्रकोप बढ़ जाता हैं.

  • जब सांस ज्यादा फूलने लगे तो तिल के तेल को हल्का गर्म करके छाती और कमर पर गरम तेल की सिकाई करें.
  • इससे छाती जल्द ही खुल जाएगी.

और सांस का फूलना भी बंद हो जायेगा ये परेशानी ठण्ड के समय ही होती हैं वैसे तो आम रहता हैं.

अंगूर

सांस फूलने या दमा की समस्या से राहत दिलाने में अंगूर बहुत लाभदायक होते हैं. इस समस्या से निजात पाने के लिए आप अंगूर भी खा सकते हैं.

अंगूर का रस का भी सेवन कर सकते हैं. कुछ चिकित्सकों का तो यह दावा है कि दमे के रोगी को अगर अंगूरों के बाग में रखा जाए तो दमा, सांस फूलने या कोई भी श्वसन सम्बन्धी समस्या में शीघ्र लाभ पहुंचता हैं.

अंगूर सांस के उपचार के लिए लाभदायक

अंगूर सांस के उपचार के लिए लाभदायक

हींग

हींग का प्रयोग दैनिक दिनचर्या में हर रोज करना चाहिए. क्योंकि हींग का रोजाना सेवन करने से आपको कभी सांस फूलने की समस्या नहीं आएगी.

  • बाजरे के दाने जितनी हींग को दो चम्मच शहद में मिला लें.
  • इसको दिन में तीन बार थोड़ा-थोड़ा पीने के साथ लें.
  • इससे सांस फूलने की समस्या एकदम ठीक हो जाएगी

सांस फूलने की बीमारी के लिए कुछ घरेलू नुस्खे | Home Remedies For Asthma in Hindi

नीबू

नींबू का सेवन करना सेहत के लिए बहुत ही अधिक लाभकारी होता है.

सांस के लिए तो इसे अमृत कहा जा सकता है. सांस फूलने या दमा की समस्या में नीबू का रस गरम पानी में मिलाकर पीना चाहिए.

इससे सांस की समस्या धीरे धीरे जड़ से खत्म हो जाती है.

सौंफ

हींग की तरह ही सौंफ का सेवन करना चाहिए. इसे भी आप अपनी दैनिक दिनचर्या में शामिल करें. इसके सेवन से शरीर में ठंडक रहती हैं.

सौंफ में बलगम को साफ करने के गुण पाए जाते हैं.

दमे के रोगी और सांस फूलने वाले रोगी नियमित रूप से इसका काढ़ा बनाकर पियें तो निश्चित रूप इस समस्या से निजात मिल जाएगी.

चौलाई के पत्तों का रस

सांस की समस्या के संधान के लिए चौलाई के पत्तों का उपयोग करना लाभकारी होता है. इससे बहुत ही जल्द लाभ मिलता है. इसके लिए आप ये उपाय करें.

  • चौलाई के पत्तों का ताजा रस लें.
  • इस रस में थोड़ा सा शहद मिलाकर प्रतिदिन सेवन करें.

चौलाई के पत्तो का प्रयोग आप किसी भी रूप में कर सकते हैं आप चाहे तो चौलाई के पत्तो के सब्जी भी बना कर खा सकते हैं|

लहसुन

दोस्तों लहसुन की मदद से भी दमा रोग ठीक किया जा सकता है (2). इसके औषधीय गुण अस्थमा की बीमारी को ऐसे दूर करते हैं.

  • लहसुन की 8-10 कलियाँ लें.
  • इन्हें एक कप पानी या दूध में उबालें.
  • जब उबालकर आधा रह जाए तो इसको नीचे उतार लें.
  • उस दूध या पानी को छानकर ठंडा होनें दें.
  • रोज़ाना रात को सोने से पहले पीयें.

इसके बाद कुछ भी न खाये या पियें. याद रहे अस्थमा का लहसुन से ये उपचार कुछ दिन तक करना है, उसके बाद आप ठीक हो जायेंगे.

लौंग और शहद से सांस फूलने की समस्या को दूर ऐसे करें

लौंग और शहद का काढ़ा पीने से श्वास नली की रुकावट दूर हो जाती है और श्वसन तंत्र मजबूत होता है.

इसके लिए चार-छः लौंग को एक कप पानी में उबाल लें.

फिर उसमे शहद मिलाकर दिन में तीन बार थोड़ा-थोड़ा पीने से सांस फूलने की समस्या एकदम ठीक हो जाती हैं.

और आपका श्वसन तंत्र भी मजबूत हो जाता हैं.

Home Remedies For Asthma Treatment

लौंग से अस्थमा का इलाज

सुहाग और मुलहठी

सुहागे की खील बनाकर चूर्ण तैयार कर लें, फिर इसमें मुलहठी का चूर्ण बराबर मात्रा में मिला लें.

और आधा से एक ग्राम की मात्रा शहद मिलाकर चाटें.

इससे श्वास नली के कष्ट दूर होकर दमा, खांसी और जुकाम में लाभ मिलता है.

इस चूर्ण को गरम जल के साथ भी लें सकते हैं.

आयु के अनुसार मात्रा अधिक या कम कर सकते हैं. इसका सेवन तीन-चार सप्ताह तक करना होता हैं.

सहजन के पत्ते

सहजन के पत्तों का सूप 18 मि.ली. के लगभग तैयार कर लीजिये.

उसमें थोड़ा नमक, काली मिर्च और नीबू का रस मिलाकर पीने से दमा, ब्रोंकाइटिस और क्षय और अन्य श्वास सम्बंधी रोग दूर होते हैं.

खास जड़े

हरड़, बहेड़ा और आंवला, विधार, असगन्ध, काली मिर्च, सौंठ, वायविडंग, पुनर्नवा, चित्रक की जड़ की छाल.

और सतगिलीय बराबर मात्रा में लेकर कूट-छानकर पांच-छह ग्राम की गोलियां बना लें.

छाया में सुखाकर एक गोली प्रातः दूध से लेने से सांस की बीमारी में लाभ मिलता हैं.

सांस फूलने की समस्या की रोकथाम | Home remedies of asthma in Hindi

  • सांस को रोकना नहीं चाहिए और ना ही रोकने की कोशिश करना चाहिए.
  • पंखे के आगे जाकर बैठें और हवा को चेहरे पर लगाने दें इससे चेहरे को राहत मिलती हैं.
  • यदि आपका वजन अधिक हैं तो अपने वजन को काम करने की कोशिश करें.
  • अगर आप 5,000 फिट के आसपास की ऊंचाई पर हैं तो तनाव और अधिक परिश्रम से बचें.

करेला की जड़

  • करेले की जड़ का चूर्ण बना लें.
  • एक चम्मच चूर्ण लेकर इसमें थोडा शहद मिलाकर रोजाना रात को खाएं.

रात्रि के समय खाने से दमे के रोगी की रात आराम से कटती हैं. लगभग एक माह तक देने; से आशातीत लाभ होता हैं.

करेले की जड़ के उक्त चूर्ण में तुलसी के पत्तों को मिलाकर देने से भी लाभ होता हैं.

विटामिन

दमे के रोगी के लिए विटामिन-E लाभदायक है. यह अंकुरित गेहूं, सोयाबीन, पिस्ता, सूरजमुखी; का तेल, नारियल, घी, मक्खन, टमाटर, अंगूर और सूखे मेवों से प्राप्त होता है.

इनका प्रयोग करने से विटामिन-E की आपूर्ति होती रहती है.

पालक के पत्ते

  • पालक के पत्तों और दो चम्मच मेथीदाना का काढ़ा बना लें.
  • इसमें चुटकी भर अमोनियम क्लोराइड और शहद मिलाकर 30 मि.ली. की मात्रा दिन में तीन बार दें.

इस उपाय से आपको बहुत ही जल्द आराम मिल जायेगा.

सूर्यमुखी के बीज

क्या आप जानते हैं सूर्यमुखी के बीज दमा के रोगी के लिए बहुत लाभदायक होते हैं?

  • सूर्यमुखी के बीजों को पीसकर एक चम्मच चूर्ण बनायें.
  • इसमें दो चम्मच शहद मिला लें.

सेवन की विधी

रोजाना दिन में एक या दो बार दे लेना चाहिए. सूर्यमुखी के फूलों को काढ़े में शहद मिला;कर सेवन करने से भी दमे में लाभ होता है.

श्वास नली के कष्ट दूर होते हैं. शहद अपने आप में बहुत उपयोगी; औषधि है. इससे स्वरयंत्र के कष्ट दूर होने में सहायता मिलती हैं.

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