प्लास्टिक बॉटल्स हो सकती हैं घातक, अगर इन चिन्हों को किया नज़रअंदाज़

हेल्थ टिप्स इन हिंदी ब्लॉग में आपका स्वागत है आज हम बात करेंगे प्लास्टिक Bottles के ऊपर बने कुछ निशानों की, हम और आप जैसे अधिकतर आमतौर पर लोग इनको ध्यान में नहीं रखते की प्लाटिक की बोतल के ऊपर कुछ निशान बने हुए होते हैं वह किस लिए होते हैं. उनका क्या मतलब होता है.

तो आज इस पोस्ट के जरिए आप जान पाएंगे की प्लास्टिक की किसी भी बोतल के ऊपर पाए जाने वाले निशान क्या संकेत देते हैं, और उनका मतलब क्या होता है. मेरा आपसे विनम्र निवेदन है इस पोस्ट को आप पूरा पढ़े और साथ ही अपने दोस्तों के बीच इसको अपनी Facebook प्रोफाइल पर जरूर शेयर करें जिससे कि हमारे भारतीय भाई-बहन जागरुक हो सके और साथ ही साथ हिंदी भाषा का भी प्रचार हो जाएगा.

प्लास्टिक की वस्तुओं पर इन संकेतों को देखकर पता लगाएं ये कितनी सुरक्षित है

दोस्तों अक्सर हम कई चीजें इस तरह से खरीद लेते हैं और हमें यह मालूम नहीं होता के इसका परिणाम क्या हो सकता है. मैं भी कई बार इस तरह से भूल कर देती हूँ, एक मिसाल के तौर पर मानो हम लोग कहीं सफर कर रहे हैं और हमें प्यास लगी तो नजदीकी रेलवे स्टेशन के किसी स्टाल पर या बस स्टॉप पर किसी भी दुकान से हम लोग पानी की बोतल खरीद देते हैं और उसको देखे या पढ़े बिना हम पानी पीकर अपनी प्यास बुझा लेते हैं.

मैं क्या शायद दुनिया के सभी लोग आमतौर पर यही करते होंगे लेकिन यह कितना खतरनाक साबित हो सकता है इस बात का पता मुझे इंटरनेट पर एक लेख पढ़ने के बाद ही पता चला तो सोचा क्यों ना मैं अपने ब्लॉग पर अपने दोस्तों के साथ इसकी जानकारी को और भी लोगों के साथ शेयर करूंगी.

HDP or HDPE होता है सुरक्षित

चलिए अब काम की बात शुरू करते हैं, हमारी जिंदगी में रोजमर्रा के सामान में आज के टाइम में सबसे ज्यादा अगर उपयोग किसी चीज का होता है तो वह है प्लास्टिक और आज हम इस पोस्ट में बात करेंगे उसी प्लास्टिक की उसके ऊपर कुछ ऐसे सांकेतिक निशान बने हुए होते हैं जिनसे आपको उसकी जानकारी मिल जाएगी जो इस पोस्ट को पढ़ने से पहले आपको नहीं थी.

आपकी जानकारी के लिए यह बता दें कि हमारे दैनिक जीवन में जो रोजमर्रा के सामान में प्लास्टिक उपयोग में लाई जाती है, सुरक्षा की द्रस्टी से इस तरह की प्लास्टिक का केवल एक ही बार इस्तेमाल किया जाना चाहिए. जैसे के HDP or HDPE होता है सुरक्षित। और उस प्लाटिक पर नीचे दिए गए चित्र वाला निशान होता है.

इस तरह की प्लास्टिक को आमतौर पर बच्चों के दूध पीने की बोतल या खिलौने और पॉलिथीन की थैलियां बनाने के काम में किया जाता है. वैज्ञानिकों की माने तो उसमें किसी भी तरह के केमिकल्स नहीं होते और इस तरह की प्लास्टिक का उपयोग आप बिना किसी डर के कर सकते हैं.

PVC OR 3V में पाया जाता है Toxic पदार्थ

इस प्रकार की प्लास्टिक नरम और लचीलेपन लिए हुए होती है, जो हमारे खाना खाने की चीजों को पैक करने के लिए या फिर घर में उपयोग में लाए जाने वाले सामान जैसे के शेम्पू के पॉउच, तेल की पेकिंग जैसे सामान के उपयोग के लिए होता है और इस तरह की प्लास्टिक में ऐसे पदार्थ होते हैं जो हमारे हारमोंस पर गलत प्रभाव डालते हैं. इसका सांकेतिक निशान आप ऊपर देख सकते हैं.

LDPE के इस्तेमाल से बचें

इसमें एक कहावत चरितार्थ होती है कि “खतरा मोल लेना” इसका मतलब है एक तो आप पानी की बोतल खरीद रहे हैं उसके पैसे भी दे रहे हैं और उसके साथ-साथ आप हानिकारक केमिकल्स भी पैसे देकर खरीद रहे हैं. क्या ये फायदे का सौदा हुआ? नहीं न हालाँकि LDPE प्लास्टिक में बहुत ज़्यादा केमिकल्स नहीं निकलता, लेकिन फिर भी इसका इस्तेमाल हानिकारक साबित हो सकता है.

PP इस प्रकार का प्लास्टिक होता है सुरक्षित


आपने देखा होगा पहले दवाइयां सिर्फ कांच की शीशी में ही आती थी. लेकिन समय के साथ ये दवाएं आज कल प्लास्टिक की शीशी में देखने को मिल जाती हैं, और ये PP प्लास्टि’क से बने मटेरियल की होतीं हैं जो की स्वस्थ और सुरक्षा की दृष्टी से एकदम सुरक्षित है।

PS प्लास्टिक को कम समय के लिए प्रयोग में लाया जा सकता है

इसका मतलब होता है पॉलीस्टीरिन जिसको कंपनी “PS ” से दर्शाती है, इस तरह का प्लास्टिक आसानी  से मिलने वाला बहुत ही हल्का और सस्ता प्लास्टिक होता है, इसका उपयोग अंडो की ट्रे या घर की कटलरी और डिसपोज़ल्स आदी केरूप में उपयोग किया जाता है, इस तरह के प्लास्टिक.को जलने या गर्म करने पर इसमें से बहुत हानिकारक पदार्थ निकलता है, आपको इस तरह के प्लास्टि:क का उपयोग लंबे समय तक नहीं करना चाहिए।

सबसे घातक प्लास्टिक होता  PC

इसका पूरा नाम है पॉलीकार्बोनेट प्लास्टिक इस तरह का प्लाटिक सबसे ज़्यादा घातक होता है, आप इसका इस्तेमाल करने से हमेशा बचें. अपने जीवन में पॉलीकार्बोनेट और बिना लेबल वाले प्लास्टिक को उपयोग में ना लाएं तो अधिक बेहतर होगा. क्योंकी हमारे भारत में इसका उपयोग लगभग 80% से ज़्यादा लोग कर रहे हैं.